अब विदेशी डिग्री नहीं जाएगी बेकार: UGC का नया क्रेडिट ट्रांसफर पोर्टल बना छात्रों का सहारा

Aroalo न्यूज़ डेस्क
प्रकाशित: aroalo.in | शिक्षा | 23 जून, 2025

नई दिल्ली:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विदेशी संस्थानों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक पहल की है। अब छात्र विदेश में प्राप्त किए गए अपने अकादमिक क्रेडिट को भारत में स्थित विश्वविद्यालयों में ट्रांसफर कर सकेंगे, और यह सब संभव होगा UGC के नए “अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट ट्रांसफर पोर्टल” के ज़रिए।

यह सुविधा भारत की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत शुरू किए गए Academic Bank of Credits (ABC) प्रणाली का हिस्सा है। इसका उद्देश्य छात्रों को वैश्विक शिक्षा प्राप्त करने की स्वतंत्रता देना, और उनके शैक्षणिक सफर को किसी भी बाधा के बिना जारी रखना है।


🌍 विदेशी शिक्षा, देश में मान्यता

अब तक जो छात्र पढ़ाई के दौरान किसी कारणवश भारत लौट आते थे, उन्हें अक्सर क्रेडिट्स की मान्यता न मिलने के कारण दोबारा कोर्स शुरू करना पड़ता था। अब यह नया पोर्टल छात्रों के विदेश में किए गए अध्ययनों को भारतीय शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ने का काम करेगा।

UGC के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार ने कहा, “यह पहल हमारे छात्रों को ग्लोबल शिक्षा में हिस्सा लेने की आज़ादी देती है, साथ ही उन्हें भारत में वापस लौटने पर बिना किसी शैक्षणिक नुकसान के आगे बढ़ने का मौका भी देती है।”


🛠️ कैसे काम करेगा पोर्टल?

यह डिजिटल पोर्टल छात्रों को अपने विदेशी विश्वविद्यालयों में अर्जित किए गए क्रेडिट्स को अपलोड और सत्यापित करने की सुविधा देगा। प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • छात्र UGC पोर्टल पर लॉगिन कर अपनी इंटरनेशनल ट्रांस्क्रिप्ट अपलोड करेगा।

  • UGC विशेषज्ञ उस क्रेडिट को भारतीय कोर्स के समकक्ष देखेगा।

  • यदि क्रेडिट मान्य पाया जाता है, तो उसे छात्र के Academic Bank of Credits (ABC) खाते में जोड़ा जाएगा।

  • भारत का कोई भी सहभागी विश्वविद्यालय उस क्रेडिट को मान्यता देकर छात्र को कोर्स कंटिन्यू करने देगा।

यह प्रक्रिया DigiLocker और ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से की जाएगी, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता बनी रहे।


🎓 छात्रों के लिए फायदे

  • जो छात्र विदेश में आंशिक रूप से पढ़ाई करने के बाद भारत लौटते हैं, उन्हें अब अपना समय और प्रयास दोबारा नहीं दोहराना पड़ेगा।

  • यह पोर्टल ड्यूल डिग्री, एक्सचेंज प्रोग्राम्स, या ऑनलाइन इंटरनेशनल कोर्सेज (MOOCs) में पढ़ रहे छात्रों को भी फायदा देगा।

  • भारत में शिक्षा अब ग्लोबल स्टैंडर्ड की ओर बढ़ेगी, और छात्रों को अधिक लचीलापन मिलेगा।

UGC ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल वही विदेशी संस्थान जिनकी रैंकिंग QS या THE में शीर्ष 1000 में हो, या जो किसी अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता निकाय से मान्यता प्राप्त हों, उनके क्रेडिट स्वीकार किए जाएंगे।


🗣️ छात्रों और विशेषज्ञों की राय

इस कदम की छात्रों और शिक्षाविदों ने खुलकर तारीफ की है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. शालिनी शर्मा कहती हैं, “हर साल लाखों छात्र विदेश जाते हैं। उनके लिए यह पोर्टल एक सुरक्षा जाल की तरह है। यह उन्हें शिक्षा में निरंतरता देता है।”

MBA की छात्रा अंजलि मेहता, जो COVID-19 के दौरान विदेश से लौट आई थीं, कहती हैं, “मेरे दो सेमेस्टर बर्बाद हो गए थे क्योंकि भारत में मेरे विदेशी क्रेडिट्स को नहीं माना गया। अगर यह पोर्टल तब होता, तो मेरी पढ़ाई एक साल पहले ही पूरी हो जाती।”


⚠️ कुछ चुनौतियाँ भी

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था को कारगर बनाने के लिए:

  • विदेशी और भारतीय कोर्सेज की तुलना निष्पक्ष और वैज्ञानिक ढंग से की जानी चाहिए।

  • क्रेडिट मॅपिंग सिस्टम को लगातार अपडेट करना होगा।

  • विश्वविद्यालयों को इस प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा।

UGC इसके लिए एक विशेष मूल्यांकन समिति बना रहा है और AI आधारित क्रेडिट तुलना टूल पर भी काम कर रहा है।


🔮 आगे की राह

UGC इस पोर्टल को लेकर कई वेबिनार्स, गाइडबुक्स, और हेल्पडेस्क लॉन्च करेगा ताकि छात्र और विश्वविद्यालय आसानी से इसे अपना सकें। साथ ही “शिक्षा-मित्र” नाम का एक AI चैटबोट भी बनाया जा रहा है जो छात्रों को प्रक्रिया में मार्गदर्शन देगा।

यह पहल न केवल लौट रहे छात्रों के लिए है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी भारत की शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।


✅ निष्कर्ष

UGC का यह इंटरनेशनल क्रेडिट ट्रांसफर पोर्टल शिक्षा की सीमाओं को मिटाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। अब भारत के छात्र दुनिया के किसी भी कोने में पढ़ाई कर सकते हैं और बिना किसी रुकावट के अपने डिग्री की पढ़ाई भारत में पूरी कर सकते हैं।

यह पहल भारत को “ग्लोबल एजुकेशन हब” बनाने की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी प्रयास है।