22 जून 2025 | नई दिल्ली | आरो आलो ऑटो डेस्क
एक समय था जब भारत में कार खरीदते वक्त सबसे पहला सवाल होता था — “कितना देती है?” यानी प्रति लीटर कितने किलोमीटर चलती है। लेकिन अब दौर बदल गया है। 2025 का भारतीय ग्राहक अब पूछता है — “NCAP सेफ्टी रेटिंग कितनी है?”
ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट्स, सोशल मीडिया पर वायरल सड़क हादसों की वीडियोज़ और बढ़ती उपभोक्ता जागरूकता ने भारतीय ऑटो बाज़ार में ‘माइलेज से सेफ्टी’ की ओर झुकाव को मजबूती से स्थापित किया है।
🔧 अब माइलेज नहीं, सेफ्टी है सबसे बड़ी प्राथमिकता
ग्लोबल NCAP ने भारत में जिस तरह से क्रैश टेस्ट रेटिंग को प्रमोट किया है, उससे ग्राहक अब पूछते हैं — “एयरबैग कितने हैं?”, “ABS है या नहीं?”, और “क्रैश में गाड़ी कितनी टिकेगी?”
करोल बाग (दिल्ली) के एक कार डीलर अमित शर्मा बताते हैं:
“पहले ग्राहक सिर्फ माइलेज पूछते थे। अब लोग पहले सेफ्टी पूछते हैं। 5 स्टार वाली गाड़ियों की डिमांड लगातार बढ़ रही है।”
टाटा पंच, महिंद्रा XUV300, और वोक्सवैगन वर्टस जैसे मॉडल, जिनकी क्रैश टेस्ट रेटिंग 4 या 5 स्टार है, ज़्यादा बिक रही हैं, भले ही माइलेज कम हो।
📊 डेटा कहता है — माइंडसेट बदल रहा है
2025 में Autocar India और ICRA द्वारा किए गए एक सर्वे में पाया गया:
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61% शहरी ग्राहक सेफ्टी को माइलेज से ज़्यादा अहमियत देते हैं। (2020 में यह आंकड़ा मात्र 29% था)
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40% से ज़्यादा ग्राहक ₹50,000–₹1 लाख ज़्यादा देने को तैयार हैं यदि गाड़ी की सेफ्टी रेटिंग अच्छी हो।
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Google पर “Safe Cars in India” जैसे कीवर्ड की सर्च तीन गुना तक बढ़ चुकी है।
🏭 कार निर्माता कंपनियों का बदलाव
सेफ्टी अब एक एक्स्ट्रा फीचर नहीं, बल्कि जरूरी बेसिक स्पेसिफिकेशन बन चुका है।
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मारुति सुज़ुकी, जिसे पहले हल्की गाड़ियों के लिए ट्रोल किया जाता था, अब 2026 तक सभी मॉडलों की सेफ्टी में सुधार लाने का वादा कर चुकी है।
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ह्यूंडई और किया ने 6 एयरबैग को नई गाड़ियों में स्टैंडर्ड बनाना शुरू कर दिया है।
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टाटा और महिंद्रा पहले से ही ‘बिल्ड क्वालिटी और क्रैश सेफ्टी’ को लेकर अग्रणी रहे हैं।
पल्लवी देसाई, एक प्रमुख ऑटो कंपनी में प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी हेड कहती हैं:
“अब सेफ्टी कोई लग्ज़री नहीं, ये ज़रूरत है। अगर नहीं है, तो ग्राहक गाड़ी छोड़ देगा।”
📱 सोशल मीडिया: जागरूकता का नया इंजन
YouTube, Instagram और Facebook पर क्रैश टेस्ट वीडियोज, रिव्यू और कार एक्सपर्ट्स ने सेफ्टी के मायने लोगों तक पहुंचाए हैं।
MotorOctane, Gagan Chaudhary, Raftaar India जैसे चैनलों पर 5 स्टार और 0 स्टार गाड़ियों के तुलनात्मक वीडियो लाखों लोग देख रहे हैं।
अर्जुन ठाकुर, एक यूट्यूब ऑटो रिव्यूअर, बताते हैं:
“अब लोग सिर्फ सेल्समैन की बात पर भरोसा नहीं करते — वे वीडियो देखकर खुद जांचते हैं कि कौन सी गाड़ी कितनी मजबूत है।”
🛣️ अभी भी कुछ चुनौतियाँ बाकी हैं
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रूरल और टियर-2 शहरों में अब भी लोग सबसे पहले माइलेज देखते हैं।
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₹6–8 लाख रेंज में कई गाड़ियों में अभी भी 2 एयरबैग ही मिलते हैं।
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ESC, हिल होल्ड असिस्ट, जैसी सेफ्टी टेक्नोलॉजी कई एंट्री लेवल कारों में अब भी गायब है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ₹10 लाख से कम की सभी गाड़ियों में 6 एयरबैग और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) अनिवार्य किया जाना चाहिए।
🔮 आने वाला कल: स्मार्ट, सेफ और सस्टेनेबल
भारत जिस तरह से ग्लोबल ऑटो हब बनने की ओर बढ़ रहा है, वहां ग्राहक का यह सेफ्टी-ओरिएंटेड नजरिया एक बड़ी ताकत बन सकता है।
अब लोग “कितना देती है?” से आगे बढ़कर पूछ रहे हैं — “अगर टक्कर हो गई तो जान बचेगी या नहीं?”